Sunday, August 29, 2021

प्रजापति का इतिहास और वंश

 आप सभी लोग जानते होंगे कि हम सभी किस वंश से सम्बंध रखते है अगर नही भी तो सुनये हम सभी ब्रहमा के पुत्र दक्ष प्रजापति के वंशज है ये पुराणों मे लिखा हुआ है।दक्ष प्रजापति यजुर वैद के बहुत अच्छे विदवान थे। एक दिन ब्रहमा जी ने खुश होकर उन्हें प्रतिष्ति पद दे दिया।उन्हे इस पर बहुत गर्व हुआ और एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया। सभी ऋषि मुनियों और देवताओ को आमंत्रण दे दिया गया। सभी ऋषि मुनी और देवता महा यज्ञ में पद्धारे और उन्होने अपना अपना स्थान ग्रहन किया। जेसे ही राजा दक्ष मंडप में पधारे सभी ने खड़े होकर उनका आदर सतकार किया लेकिन ब्रहमा जी और शिव जी अपने स्थान पर बैठे रहे। ये बात दक्ष प्रजापति को अच्छी नही लगी और उन्होंने कहा कि शिव जी मेरे दामाद हे उन्होने मेरा आदर नही किया और इसलिए उन्हें इस महा यज्ञ में भाग लेने का अधिकार नही है। शिव जी ये सब शांत भाव से सुन रहे थे लेकिन नंन्दी को ये बात बिलकुल भी अच्छी नही लगी और उसने कहा हे दक्ष तुम्हे अपनी पदवी पर गर्व है तुम भगवान शिव को केवल अपना दामाद न समझों बलकि तुमने तो ये बात कह कर उनका अनादर किया है। इसलिए मै तुम्हे शाप देता हू तुम्हारा समस्त वंश कलयुग मे ब्रहमण के नाम से नही जाना जाएगा। तुम्हारा वंश गैर ब्रहमण से जाना जाएगा।नन्दी के शाप के कारण तभी से प्रजापति जाति निचे गिरती चली जा रही है।ब्रहमण समाज विरासत से ही प्रतिष्ठित समाज रहा है और हमारा समाज हम जानते है पिछड़ता जा रहा है।इन सभी बातों का उल्लेख भागवत गीता और पुराणों मे भी किया गया है।

प्रााचीन काल में आर्य जाति व समाज को चार भागों में बाटा गया था।

1.ब्रहम्ण
2.क्षतरीय
3.वैश्या
4.शुद्र

शुद्र जाति के लोग भी ब्रहम्ण् हो सकते है। वाल्मिकि ऋृषि जन्म से शुद्र जाति से सम्बंधित थे बाद मे वो ब्रहम्ण हो गए। वर्तमान जाति और प्रजातियां अपनी कुशलताओं के आधार पर बनी है।


प्राचीन काल में प्रजापति समाज बहुत बड़े दरजे पर था उस समय उच्ची जातियों के लोग प्रजातियों के घरों मे ठहरते थे। दवापर युग में पाण्डव भी प्रजापति के घर में ठहरे थे।प्रजापति समुदाय की संस्कृति साफ ओैर सवच रही है। लम्वे समय से इस समुदाय का पतन या ये कहें कि प्रजापति समाज पिछड़ता जा रहा है।

केवल ब्रहमा जी है जो मानवता को बनाने के लिए पांच तत्वों का प्रयोग करते है जैसे- वायु़ ,जल, मिटटी, आकाश और आग। ब्रहमा जी के बेटे दक्ष प्रजापति भी इन्ही पांच तत्वो का इस्तेमाल करके बर्तनों मे कलाकारी करते है।इन सभी वस्तुऔ का उपयोग मुख्यत सभी लोगो के द्वारा किया जाता है।लोग इनका उपयोग खाने में, पीने में, रहने में और पुजा मे करते है।अमीर हो या गरीब ये वस्तुए सभी लोग इस्तेमाल करते है।

वर्तमान समय में मिट्टीके बर्तनों के काम मे कमी आयी है क्योंकि मिटटी के बर्तनो की जगह पर लोहे तांबा और स्टील के बर्तनों की मांग बढ़ने लगी है।बहुत से ऐसे कारण है जिनके कारण प्रजापति समुदाय के लोग पिछड़ रहे है। एक मुख्य कारण शिक्षा में कमी शिक्षा में कमी के कारण हमारी गतिशीलता मे वृद्धी सीमित हो जाती है।दुसरा ये कि प्रजापति समुदाय के लोग दुसरों पर निर्भर है।

लेकिन धीरे -धीरे समय बदल रहा है प्रजापति समुदाय के लोग शिक्षा के लिए आगे आ रहे है कुछ लोग विदेश भी जा रहे है और कुछ दुसरे समाज के लोगो के साथ मिलकर आगे बढ़ रहे है। धीरे -धीरे जो बैठने और खाने की बाधा थी वो खत्म होती जा रही है।

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